ब्रिटिश काल में नियुक्त विभिन्न आयोग

यह भारत में सभी मसलों की जांच करने तथा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाये गए आयोगों की सूची है।इन आयोगों के उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों से सम्बन्धित है – शिक्षा, अकाल, दर्द से रहत देने वाली दवा, मुद्रा, सेना, कृषि, भारतीय राज्यों का ब्रिटिश राज के साथ सम्बन्ध आदि। यह कालानुक्रमिक क्रम आपको आयोगों पर अलग राय रखने में सहायता करेगा।

शैक्षिक आयोग
1854 : चार्ल्स वुड डिस्पैच

वाइसरॉय :डलहौज़ी
वुड डिस्पैच का उद्देश्य – भारतीयों को यूरोपीय ज्ञान प्रदान करना। भारत से लोक सेवकों को तैयार करना। व्यावहारिक व व्यावसायिक कौशल विकसित करना तथा बौद्धिक विकास करना।

आयोग की शिफारिशें –

प्राथमिक विद्यालय से विश्वविद्यलय स्तर तक व्यवस्थित शिक्षा के लिए प्रावधान।
प्रत्येक प्रान्त में शैक्षिक विभाग स्थापित करना।
भारत के बम्बई, कलकत्ता व मद्रास जैसे बड़े शहरों में विश्वविद्यालय की स्थापना।
हर जिले में कम से कम एक स्कूल।
आंग्ल- स्थानीय भाषा में शिक्षा। प्राथमिक स्तर पर स्थानीय भाषा व उच्च शैक्षिक स्तर पर अंग्रेजी में शिक्षा।
सरकारी स्कूलों में दी जानेवाली शिक्षा धर्मनिरपेक्ष होनी चाहिए।
गैर- सरकारी संस्थानों को प्रोत्साहित करने की लिए अनुदान सहायता की सिफ़ारिश।

1882 : हंटर आयोग

वाइसरॉय : रिपन
अध्यक्ष : विलियम हंटर
लक्ष्य : शिक्षा का विकास
हंटर आयोग का गठन मुख्य रूप से वुड के घोषण पत्र का शिक्षा के क्षेत्र पर पड़नेवाले प्रभाव की समीक्षा करने के लिए किया गया। प्राथमिक व आध्यात्मिक स्तर पर जिन विषयों को अनदेखा किया गया, उनका भी निरीक्षण इस आयोग ने किया। इस आयोग ने प्राथमिक व माध्यमिक स्तर की शिक्षा में सुधार का सुझाव दिया। विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा पर केंद्रित।

आयोग की सिफारिशें –

प्राथमिक स्तर पर
शिक्षा उपयोगी ,प्रायोगिक व जीवन से जुड़ी होनी चाहिए।स्थानीय भाषा (मातृभाषा ) में शिक्षा।प्राथमिक शिक्षा के लिए प्रबंधन – जिला बोर्ड और नगर निगम बोर्ड की जिम्मेदारी।शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण स्कूल।माध्यमिक स्तर
माध्यमिक शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों की नियुक्ति।
शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी में होना चाहिए।
अनुदान सहायता प्रणाली आरम्भ।
महिलाओं, मुस्लिमों व अन्य पिछड़ोंकी शिक्षा को प्रोत्साहन।

1902 : रैले आयोग

वाइसरॉय : कर्जन
अध्यक्ष : थॉमस रैले
लक्ष्य : विश्वविद्यालयी अध्ययन और सुधार
इस आयोग का प्रयोजन भारत के विश्वविद्यालयों के सुधार के लिए सिफारिशें करना था। ये सिफारिशें कर्जन के द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 के रूप में लागू किया गया।

सिफारिशें –

भारत में विश्विद्यालय सीनेट में सुधार के लिए विनियम।
सीनेट विनियमों का अधिकार सरकार के पास होगा। वह विनियमों को संशोधित अथवा पारित कर सकती है।
विश्वविद्यालयों द्वारा सम्बद्ध संस्थानों की सख्त निगरानी।
विश्वविद्यालयों को पढ़ाईऔर शोध कार्यों की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए।

1917 : सैडलर आयोग (कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग )

वाइसरॉय : चेम्सफोर्ड
अध्यक्ष : माइकल सैडलर
लक्ष्य : विश्वविद्यालय की स्थिति
यह आयोग मुख्या रूप से कलकत्ता विश्वविद्यालय की स्थिति की समीक्षा करने के लिए गठित हुआ। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक शिक्षा को विश्वविद्यालयी शिक्षा से अलग करके विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को बेहतर करना था।

सिफारिशें –

शिक्षा का भार काम करने के लिए माध्यमिक शिक्षा को विश्वविद्यालयी शिक्षा से अलग कर देना चाहिए।
प्रत्येक प्रान्त में माध्यमिक शिक्षा के लिए बोर्ड का निर्माण।
स्कूली शिक्षा की समय सीमा 12 वर्ष होनी चाहिए।
विश्वविद्यालय स्तर के लिए इंटरमीडिएट की परीक्षा ही प्रवेश परीक्षा होनी चाहिए।
विश्विद्यालय को केंद्रीकृत,एकात्मक आवासीय स्वायत्त शिक्षण निकाय के रूप में कार्य करना चाहिए।

1929 : हर्टोग आयोग

वाइसरॉय : इरविन
लक्ष्य : शिक्षा का विकास
शिक्षा के लिए उल्लेखनीय कदम उठाने के बाद भी स्थिति संतोषजनक नहीं थी। शिक्षण संस्थानों की बढ़ती संख्या से शिक्षा का स्तर गिरने लगा। इस आयोग का गठन शिक्षा के विकास का निरीक्षण करने के लिए किया गया।

सिफारिशें –

प्राथमिक शिक्षा पर जोर। शिक्षण संस्थानों के विस्तार के स्थान पर समेकन (संगठित ) की निति।
प्राथमिक पाठ्यक्रम के लिए समय सीमा 4 वर्ष निर्धारित
शिक्षकों की गुणवत्ता, ओहदा तथा वेतन पर ध्यान केंद्रित
पाठ्यक्रम तथा शिक्षण विधि गावों के जीवन से जुड़ी होनी चाहिए।तथा इसका प्रयोजन गावों का विकास होना चाहिए
केवल योग्य छात्र ही हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की पढाई के लिए जाने चहिये। इसलिए औसत छात्रों के लिए विविध पाठ्यक्रमों को आरम्भ करना
उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए दाखिला सीमित होना चाहिए(विश्वविद्यालय स्तर पर )

1944 : सार्जेन्ट प्लान (योजना )

वाइसरॉय : वावेल
अध्यक्ष : जॉन सार्जेन्ट
लक्ष्य : ब्रिटेन की तरह शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाना
सार्जेंट योजना का लक्ष्य भारतीय शिक्षा प्रणाली का पुनर्गठन था। जॉन सार्जेन्ट के अंतर्गत आयोग ने केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंपी। युद्ध के उपरांत शैक्षिक विकास की यह योजना मुख्य रूप से उच्च शिक्षा (विश्वविद्याय प्रणाली ) की गुणवत्ता को बढ़ाने पर केंद्रित थी।

सिफारिशें –

पूर्व प्राथमिक बेसिक स्कूल 3 -6 वर्ष के आयु समूह के बच्चों के लिए
6 -14 वर्ष आयु समूह के बच्चों के लिए अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा
हाई स्कूल की शिक्षा दो प्रकार की – 1. अकादमिक, 2. तकनिकी व व्यावसायिक
शिक्षकों के लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम व बेहतर वेतन।
मध्यमवर्ती पाठ्यक्रमों का उन्मूलन
विश्वविद्यालय का स्तर ऊँचा होना चाहिए। दाखिला सीमित होना चाहिए जिससे केवल योग्य विद्यार्थी ही उच्च शिक्षा के लिए आगे जा सकें।

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